दिल्ली, सुल्तानपुर बर्ड अभयारण्य दिल्ली से 46 किमी की दूरी पर स्थित घरेलू और प्रवासी पक्षीयों के लिए एक किस्म का स्वर्ग है। हर साल सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षी यहाँ आते है। यहाँ पर नील गाय, हिरन भी मौजूद है। 
भारत के हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला जिले में नन के लिए डोल्मा लिंग ज़नाना मठ बनाया गया है। यहाँ पर इनकी हर जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। यहाँ पर इनकी अध्ययन सामग्री, धार्मिक गतिविधियों, और रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा किया जाता है । इन्हे धार्मिक शिक्षण के साथ -साथ तकनिकी शिक्षण भी दिया जाता है। ज़नाना मठ को पहले से तयशुदा आगंतुकों और पर्यटन के लिए खौला जाता है। प्रार्थना और पूजाओं विशेष अनुरोध करके प्रोफोर्म भी करवाया जाता है।
दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे 28वें अंतर्राष्टीय व्यापार मेले का उद्दघाटन 14 नवम्बर को भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के द्वारा किया गया। इस साल जितने भीड़ आने की उम्मीद थी उतनी भीड़ नही आ रही है। यहाँ पर शौपिंग करने के लिए बहुत कुछ है एक ही जगह पर आप भारत के साथ साथ दूसरे देशो के पवेलियन से भी शौपिंग कर सकते है।
तिब्बत बहुत सी कलाओं का केन्द्र रहा है , धर्मशाला में रह रहे तिब्बतियो के अनुसार चीन अधिकृत तिब्बत में उनकी इन कलाओ का सम्मान नही किया जाता है।1949 चीनी कब्जे के बाद तिब्बत के लोंगो ने भारत , नेपाल, जैसे पडोसी देशो में पनाह ली। और उन्होंने अपनी कलाओ को संरक्षण के लिए उनका प्रयोग यहाँ पर करना आरम्भ कर दिया जिससे वो कुछ पैसे कमा कर अपने समाज की समस्याओ का समाधान कर सके और साथ ही तिब्बत की समृध्द सांस्क्रतिक धरोहर को बरक़रार रख सके। तिब्बत में वैसे तो बहुत सी हस्तकला है । थांगा पेंटिंग , लकड़ी पर दस्तकारी , कपड़ो से उनकी परम्परिक पोशाक बनाना आदि उनमे से कुछ है।














